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पंचक के दौरान क्यों अशुभ माना जाता है कांवड़ यात्रा?

Panchak Me Kawad Yatra

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. यह महीना भगवान शिव की भक्ति का माना जाता है. इस महीने में भगवान शंकर के जलाभिषेक का विशेष महत्व है. माना जाता है जलाभिषेक से शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. इसलिए कांवड़ यात्रा निकाली जाती है.

सावन में श्रद्धालु कांवड़ में पवित्र जल लेकर एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान जाकर शिवलिंगों का जलाभिषेक करते हैं. यह यात्रा सावन के पहले दिन से ही शुरू हो जाती है, लेकिन बीते 20 जुलाई से आज यानी 24 जुलाई तक पंचक चल रहा है. पंचक में काष्ठ खरीदना और कांवड़ उठाना प्रतिबंधित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान काष्ठ खरीदने से लेकर कांवड़ उठाने तक सब प्रतिबंधित है.

दक्षिण दिशा में यात्रा करने से श्रद्धालु परहेज करते हैं. हालांकि पंचक में शिवभक्तों के हरिद्वार आने का क्रम जारी रहेगा, लेकिन वापसी में इसका असर देखने क मिल सकता है. हरिद्वार से नई कावड़ लेकर जाने वाले शिवभक्त पंचक समाप्ति के बाद ही नई कावड़ लेकर हरिद्वार से रवाना होंगे.

इसलिए इस दौरान हरिद्वार पहुंचने वाले शिवभक्तों की संख्या कम रहेगी. जबकि सावन में औसतन हर रोज करीब 5 से 7 लाख कांवड़ यात्री यहां पहुंचते हैं.

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