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28 सितंबर को खत्म होगी महामारी


पंचांगीय विवरण पर बोले बाल ब्रह्मचारी प्रद्युम्न तिवारी

कोरोना को लेकर जहां पूरे विष्व में हल्ला मचा हुआ है और कई प्रकार के अंकीय, पूर्व घोषित भविष्य वाणियों, षास्त्रों में वर्णित भविष्य आदि का दौर चल रहा है। इस बीच पंचांगीय विवरण के आधार पर 1 मई को बाल ब्रह्मचारी प्रद्युम्न तिवारी ने इस महामारी का प्रकोप 27 सितंबर 2020 तक बताया है। उनके अनुसार 28 सितंबर से इस महामारी का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा। यानी इस बीमारी से पूरे विष्व को छुटकारा मिल सकेगा।

5 मई के बाद भयानक रूप लेगा कोरोना
बाल ब्रह्मचारी तिवारी ने 1 मई को पंचागीय विवरण के आधार पर बताया कि 5 मई 2020 को षनि अपनी स्वराषि मकर में वक्रीय हो जाएंगे। षनि के वक्रीय होने से यह महामारी और भी दो गुनी तेजी से फैलने लगेगी। इसके ठीक 9 दिन बाद 14 मई 2020 को गुरु भी अपनी निज राषि में व्रकीय हो जाएंगे, जिससे थोडी राहत मिलेगी। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों की नहीं रहेगी। इसके दो महीने बाद 15 जुलाई 2020 को गुरु मकर को छोड धनु राषि में प्रविष्ट हो जाएंगे। मकर में पहले से केतु उपस्थित हैं, जहां दोनों मिलकर इस महामारी को फिर से पुनर्जिवित कर देंगे। ऐसा नहीं कि यह महामारी कोरोना के नाम से ही जानी जाए, यह नए नए रुपों में सामने आएगी। इसके 20 दिन बाद 5 अगस्त 2020 को षनि भी अपनी स्वराषि को छोड धनु राषि में पहुंच जाएंगे। इससे तीनों ग्रह फिर से एक साथ होने पर महामारी का चर्माेत्कर्ष देखने को मिलेगा। हालांकि यह ज्यादा दिन नहीं चलेगा।

केतु के राषि परिवर्तन से मिलेगा इलाज
3 सितंबर 2020 को केतु राषि परिवर्तन कर धनु से वृष्चिक में चले जाएंगे। इस परिवर्तन से महामारी का कोई ना कोई उपचार या दवाई मिल जाएगी। इसके बाद स्थितियां लगातार ठीक होने लगेंगी। 28 सितंबर 2020 को षनि के मार्गीय होने से महामारी का कहर समाप्त हो जाएगा।

ऐसे बने थे महामारी के योग
पंचागीय विवरण के आधार पर ब्रह्मचारी ने बताया कि 29 अक्टूबर 2019 को षनि, गुरु और केतु एक साथ धनु राषि में गोचर कर रहे थे। ये तीन बडे बडे ग्रह जब भी एक साथ आते हैं तो कोई ना कोई विष्व युदध, संकट अथवा दुर्भिक्ष लेकर आते हैं। तीनों ग्रहों के एक साथ आने पर इस महामारी का जन्म हुआ और उससे ठीक दो महीने बाद 29 दिसंबर 2019 को षनि, गुरु और केतु के साथ सूर्य और बुध भी धनु राषि में आ गए। जब ये पांचों ग्रह एक साथ मिले तभी इस कोरोना महामारी का विकास हुआ। इसके बाद आज यह महामारी आपके और हमारे समक्ष इस भयंकर रूप में उपस्थिति है।

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