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जो बेरोजगारी काट रहे थे उनके लिए किया कामकाज का इंतजाम


एक साल बेमिसाल की परिभाषा सार्थक करने में कामयाब रहे कलेक्टर बनोठ


धार।
धार एक आदिवासी बाहुल्य जिला है, जहां कामकाज की परीक्षा में सफल होना काफी कठिन होता है। पहाडी क्षेत्र में गर्मी की मार कम करने के लिए कंटूर ट्रेंच योजना से हरियाली फैलाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाने का सफल प्रयोग हो या जल संरक्षण को लेकर कवायद। हर काम में कलेक्टर श्रीकांत बनोठ ने अपनी कार्यप्रणाली का परिचय दिया है। इधर बेरोजगारी काट रहे जिले के युवा बेराजगारों के लिए भी कलेक्टर ने बेमिसाल होने की परिभाषा को सार्थक करने कोषिष की है। जिले के आदिवासी नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर श्रीकांत बनोठ ने सेना में भर्ती होने के लिए पूरे जिले में एक विशिष्ट मुहिम चलाई। इसके तहत विकासखंड स्तर पर सेना के मापदंडों के अनुरूप नौजवानों के चयन के लिए शिविर लगाए गए और इन शिविरों में से चयनित युवाओं को जिला मुख्यालय पर विशिष्ट प्रशिक्षण दिलवाया गया। इस बीच प्रशिक्षण में सभी चयनित नौजवानों को विभिन्न सुविधाओं के साथ पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया गया। बता दें कि जिले में पहली बार सेना में भर्ती होने के लिए निशुल्क प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जो कलेक्टर की व्यक्तिगत रुचि और जागरूकता का परिचय है। प्रशिक्षण में 160 से भी अधिक नौजवानों ने सेना में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।
गौरतलब है कि श्रीकांत बनोठ को धार जिले की कलेक्टरी करते हुए 4 जून को एक साल पूरा हुआ है। हालांकि उनके लिए यह जिला नया नहीं है। इससे पहले भी वे धार में बतौर अधिकारी सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन तब वे एसडीएम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आदि पदों पर रहे हैं। कलेक्टरी के इस एक साल में बनोठ ने जिले में कुशल प्रशासनिक मार्गदर्शन और नेतृत्व देकर चौतरफा उपलब्धियां दिखाई है। मिस्टर कूल कलेक्टर ने जिले में हरियाली बढ़ाने के प्रयास, विस्थापितों का पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए किए गए कार्य, नौजवानों को रोजगार दिलाने के अवसर की कवायद, अच्छी कानून व्यवस्था, मांडू महोत्सव का सफल आयोजन यहां तक कि कोरोना से लड़ाई में जीत की सकारात्मक सोच और मेहनत दिखाई है।


विस्थापितों का पुर्नवास
धार जिला एक आदिवासी बहुल जिला है जिसमें विशिष्ट चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।सरदार सरोवर बांध के निर्माण के चलते निसरपुर एवं कुक्षी क्षेत्र के डूब विस्थापितों का पुनर्वास एक बहुत बड़ी चुनौती रहा है।गत वर्ष वर्षा काल में जब बांध को सर्वोच्च स्तर तक भरा गया तब इस क्षेत्र के विस्थापितों का पुनर्वास करना एक महती कार्य था।इस कार्य को कलेक्टर श्रीकांत बनोठ द्वारा बड़ी सफलता से बिना किसी तनाव के पूर्ण किया गया।


हरियाली के हरकारे
जिले के चौमुखी विकास के लिए कलेक्टर श्रीकांत बनोठ द्वारा निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उन्नयन के लिए मार्गदर्शन दिया जाता रहा है। पर्यावरण के प्रति अपनी सकारात्मक सोच के चलते श्री बनोठ के मार्गदर्शन में जिले की बंजर पहाड़ियों को हरा-भरा करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा रहा है। आज जिले की अनेकों बंजर पहाड़ियां फिर से लहलहा रही हैं और उनमें फलदार पौधे फल फूल रहे हैं।इन बंजर पहाड़ियों पर पौधारोपण के साथ-साथ जल संरक्षण हेतु कंटूर एवं अन्य संरचनाएं बनाने का कार्य भी किया गया है। लाखों पेड़ इन पहाड़ियों पर लग चुके हैं।


सफल मांडू उत्सव
मांडव या मांडू न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारत के सबसे अच्छे पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां के ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प महत्वकी ओर अभी भी बहुसंख्यक लोगों का ध्यान नहीं है। ऐतिहासिक महलों,विशिष्ट वास्तुकला, पवित्र धार्मिक स्थानों और प्राकृतिक सौंदर्य मांडू को दिल से प्यार करने वाला स्थान बनाते हैं।
मांडू की विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए मप्र सरकार के जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा मांडू उत्सव का आयोजन किया गया था। सात दिवसीय महोत्सव का आयोजन पिछले साल के अंतिम सप्ताह में किया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कलाकारों के संगीत समारोहों, महान चित्रकारों के प्रदर्शन अन्य कलाकारों, लोक नृत्यों, स्थानीय व्यंजनों का प्रस्तुतिकरण मांडू फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षण रहे । इन आकर्षक प्रदर्शनों के अलावा, मांडू उत्सव में साहसिक एडवेंचर गतिविधियाँ जैसे हॉट एयर बैलून, पैराग्लाइडिंग, पैरा मोटरिंग, पैरा सेलिंग, बंजी जम्पिंग, वाटर स्पोर्ट्स, एटीवी राइड्स इत्यादि फेस्टिवल की एक और खासियत रही, जिसकी देश विदेश में भी काफी प्रशंसा हुई थी। जिला प्रशासन धार और मप्र पर्यटन विभाग के इस संयुक्त आयोजन से देश विदेश में माण्डव को लेकर बहुत उत्साह जनक प्रतिसाद प्राप्त हुआ और इस सात दिवसीय मांडू फेस्टिवल में विदेशियों सहित समूचे देश के हजारों पर्यटकों ने सहभागिता की ।जिला प्रशासन के मुखिया के रूप में कलेक्टर श्रीकांत बनोठ द्वारा व्यक्तिगत रुचि लेकर सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देकर सुचारू आयोजन सुनिश्चित किया गया।


बेहतर कानून व्यवस्था
जिले की कानून व्यवस्था को भी सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधीश द्वारा निरंतर भ्रमण, बैठक एवं समुदायों से बातचीत कर जिले में शांति बनाए रखने के कार्य को भी अंजाम दिया गया है।जिले में एनसीआर और नागरिकता विरोधी आंदोलन के दौर में भी कोई बड़ा प्रदर्शन या विरोध ना होना कलेक्टर की सफलता कही जा सकती है।


कोरोना का सामना
कलेक्टर श्रीकांत बनोठ के नेतृत्व में एक वर्ष में धार जिले ने अनेक उपलबधिया हासिल की हैं। कोविड 19 महामारी के दौर में जहां समूचा भारतवर्ष पीड़ित रहा है वही धार जिले में कोविड 19 की रोकथाम के लिए सफलतापूर्वक प्रयास किए गए।जिनके सुखद परिणाम सामने आए हैं । जिले में अभी तक 125 से अधिक कोविड 19 के मरीज मिले हैं जिनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया ।उचित देखभाल और प्रभावी उपचार के चलते धार जिले के 125 से अधिक मरीजों में से 115 मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। कोरोना मरीजों में स्वस्थ होने का यह प्रतिशत राष्ट्रीय औसत और प्रदेश के औसत से बहुत ज्यादा है जिसमें लगभग 90þ मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर अपने अपने घरों को जा चुके हैं ।


अकल्पनीय कायाकल्प
कलेक्टर श्रीकांत बनोठ द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन के लिए पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से सीएसआर मद में सहयोग हासिल कर न केवल जिला अस्पताल बल्कि समूचे जिले के 45 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा उपकरणों और अन्य साजो सामान की उपलब्धता करवाई गई। जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल में निजी चिकित्सालय को मात देते हुए मेल एवं फीमेल वार्ड तैयार हो चुके हैं। यह सारा कार्य कलेक्टर श्रीकांत बनोठ के व्यक्तिगत प्रयासों से संभव हो सका है।

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