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दुनिया के वो पांच देश, जिनके पास नहीं है अपनी कोई सेना, ऐसे होती है सीमा की सुरक्षा

किसी भी देश में सुरक्षा के दो स्तर होते हैं, पहला पुलिस और दूसरा सेना। जहां पुलिस की जिम्मेदारी देश की आंतरिक सुरक्षा की होता है, तो वहीं सेना की जिम्मेदारी बाहरी सुरक्षा की होती है यानी बॉर्डर (सीमा) की सुरक्षा। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं, जिनके पास अपनी कोई सेना है ही नहीं। इनमें से कुछ देशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो दूसरे देश उठाते हैं।

वैटिकन सिटी, जो दुनिया का सबसे छोटा देश है, उसके पास किसी तरह की कोई आर्मी (सेना) नहीं है। यहां पहले नोबल गार्ड हुआ करते थे, लेकिन साल 1970 में इस संस्था को ध्वस्त कर दिया गया। इस देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी इतालवी सेना की है।

मोनैको भी एक छोटा सा देश है, जहां 17वीं शताब्दी से ही किसी तरह की कोई सेना नहीं है। हालांकि यहां दो छोटी-छोटी फौजी टुकड़ियां हैं, जिसमें से एक राजकुमार की सुरक्षा करती है और एक नागरिकों की। फ्रांस की सेना इसे सुरक्षा प्रदान करती है।

मॉरीशस एक बहुसांस्कृतिक देश है। यहां भी साल 1968 से ही किसी तरह की कोई सेना नहीं है। हालांकि यहां 10,000 पुलिस कर्मी हैं, जो आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं।

यूरोप के दूसरे सबसे बड़े द्वीप आइसलैंड में भी साल 1869 से ही कोई सेना नहीं है। यह देश नाटो का सदस्य है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की है।

मध्य अमेरिका के कैरिबियाई क्षेत्र में स्थित देश कोस्टा रिका में साल 1948 के बाद से कोई भी सेना नहीं है। 1948 में यहां भयंकर गृहयुद्ध छिड़ गया था, जिसके बाद इस देश ने अपनी सेना समाप्त कर दी। यह देश बिना सेना के चलने वाले बड़े देशों में शुमार है। हालांकि यहां आंतरिक मामलों को सुलझाने के लिए पुलिस है।

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