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भीड़ इकट्ठा ना हो इसलिए परिजन का तीजे की रस्म से इंकार


ब्लड कैंसर से मौत के बाद परिजन का भीड़ ना इकट्ठा करने के लिए अच्छा फैसला

मंदसौर.
दो साल तक ब्लड कैंसर से जूझ रहे 42 वर्षीय युवक की रविवार को मौत हो गई. जिला अस्पताल में दम तोड़ने वाले कसाईबाड़ा की नियाज पिता निजामुद्दीन को उसके एक भाई के साथ दो पड़ोसियों ने मिलकर सुपुर्द ए खाक किया. जबकि परिजन ने भीड़ इकट्ठा न करने के लिए तीजे की रस्म से भी इंकार कर दिया. गौरतलब है कि कोरोनावायरस से फैली महामारी के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का ज्यादा ख्याल रखा जा रहा है. इसको लेकर परिजन के इस निर्णय पर समुदाय फक्र महसूस कर रहा है.
मृतक के परिचित डॉ. शाहिद कुरैशी के अनुसार सुपुर्द ए खाक करने से पहले अंजुमन सदर शकील अली ने परिजन से चर्चा की थी, जिन्होंने जनाजे में भीड़ इकट्ठा ना करने को कहा और इसीलिए शव को जिला अस्पताल से सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया. नियाज को सुपुर्द ए खाक करने में उनका एक भाई और दो पड़ोसी शामिल रहे. डॉ. कुरैशी के अनुसार नियाज फेरी लगाकर परिवार पालन करता था. उसके परिवार में एक पत्नी और तीन बच्चे हैं. डॉक्टर ने यह भी बताया की नियाज ब्लड कैंसर के कारण काफी परेशान था, जिसका अहमदाबाद में इलाज चल रहा था. करीब 5 महीने पहले ही वह अहमदाबाद डॉक्टर को दिखा कर लौटा था. तीजे की रस्म में समाज के लोग जमा होते हैं और महामारी के कारण यह समय भीड़ का नहीं है. इसलिए परिजन ने घर में ही परिवार के लोगों द्वारा तीजे की रस्म अदा करने का निर्णय लिया है.

किसी ने कहा ब्लड कैंसर, कोई समझा कोरोना से मौत
रविवार को नियाज की मौत के बाद जैसे ही खबर फैली, कई तरह की अटकलें शुरू हो गई. हालांकि मृतक के जो परिचित हैं, वे जानते हैं कि नियाज कैंसर से पीड़ित था. जबकि उसी मोहल्ले में पहले एक कोरोना पॉजिटिव मिलने से कुछ लोग इस मौत को महामारी से बता रहे थे. इस कारण लगभग 2 घंटे तक अफरा-तफरी रही. इधर कलेक्टर मनोज पुष्प ने कहा अफवाहों पर ना ध्यान दें और ना ही बगैर पुष्टि के अनर्गल बात करें. यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

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