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जून माह के आखिर तक सुधर जाएगी देश की बिगड़ी परिस्थितियां

मोहनखेड़ा तीर्थ के आचार्य ऋषभ चंद्र सुरीश्वर जी मसा ने की कोरोना महामारी से ध्वस्त व्यवस्थाओं के सुधरने की घोषणा

धार.

कोरोनावायरस से फैली महामारी के कारण पूरा विश्व अस्त व्यस्त है. हर देश में इस संक्रामक बीमारी के कारण ना केवल लाखों लोग बीमार हैं बल्कि हजारों की जान तक जा चुकी है. इस महामारी की चपेट में भारत देश भी है जिसकी उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं लगभग ध्वस्त हो चुकी है. इस संक्रामक महामारी के कारण देश आर्थिक संक्रमण से भी गुजर रहा है, जिससे ना केवल गरीब बल्कि अमीर लोग भी परेशान हैं. मोहनखेड़ा महातीर्थ के आचार्य ऋषभ चंद्र सुरीश्वर जी ने घोषणा की है कि जून माह के अंत तक ना केवल कोरोना नामक संक्रामक महामारी का असर बिल्कुल कम हो जाएगा, बल्कि इससे बिगड़ी सभी व्यवस्थाएं भी सुधर जाएंगी.

 
चातुर्मास को लेकर ना करे दिखावे का आडंबर

इधर कोरोनावायरस से बिगड़े इंतजाम को देखते हुए आचार्य श्री ने श्रीसंघ से यह अनुरोध भी किया है कि चातुर्मास को लेकर वे दिखावे का आडंबर ना करे और इसको लेकर उन्होंने श्री संघ से खुद मार्गदर्शित होने का भी अनुरोध किया है. आचार्य श्री ने यह भी कहा है कि संक्रामक महामारी के कारण चल रहे लॉक डाउन से कई साधु साध्वी शहर या गांवों में फंसे हुए हैं, जो ना तो वहां से आगे जा सकते हैं ना पीछे. इस कारण आचार्य श्री ने सकल संघ से अनुरोध किया है कि उनकी ही निश्रा में अपनी चातुर्मास की आराधना पर्यूषण आदि वितरण वाणी का श्रवण बहुत ही सादगी पूर्ण माहौल में करें एवं करावें. चातुर्मास को लेकर आचार्य श्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 4 जुलाई से हमारे साधु साध्वी आचार्य भगवंतों के चातुर्मास प्रारंभ होने वाले हैं. अतः समस्त आचार्य एवं गच्छाधिपति पूज्य भगवंतों से उन्होंने आग्रह किया है कि आने वाले चातुर्मास प्रवेश के समय किसी प्रकार का आडंबर श्री संघ नहीं करे.

सामूहिक तपस्या ओं का ना करें आयोजन

कोरोना महामारी से निपटने के लिए जहां सरकारें सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व बताते हुए इसका पालन करवा रही है वहीं मोहनखेड़ा महातीर्थ के आचार्य श्री ऋषभ चंद्र सुरीश्वर जी मसा ने  श्रावक श्राविकाओं से यह भी अनुरोध किया है कि वे सामूहिक भव्य तपस्याओं के आयोजन ना करते हुए सवा लाख नवकार महामंत्र का जाप करें और सकल संघ व सृष्टि में रोग उपद्रव की शांति की कामना करते हुए चातुर्मास की अपनी आराधना करें.

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