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फोन पर सबसे पहले क्यों कहते हैं हैलो, जानें, दिलचस्प कहानी


घर-घर के बाद अब फोन हर जेब में पहुंच गया है. क्या देश-क्या विदेश, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, सभी फोन पर पहला शब्द ‘हैलो’ ही बोलते हैं. बोलने वाला हो या सुनने वाला, हैलो से ही बात की शुरुआत होती है. आखिर क्यों? आज हम आपको बताते हैं, इसके पीछे की असली वजह. यानी Hello शब्द कहां से उत्पन्न हुआ है और इसका प्रयोग क्यों किया जाता है?

सबसे पहले आपको बता दें, 21 नवंबर 1973 से पूरी दुनिया में हैलो डे मनाया जाता है. ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी की मानें तो हैलो शब्द पुराने जर्मन शब्द हाला, होला से बना है, जिसका इस्तेमाल नाविक करते थे. ये शब्द पुराने फ्रांसीसी या जर्मन शब्द ‘होला’ से निकला है, जिसका मतलब होता है ‘कैसे हो’?

अंग्रेज कवि चॉसर के जमाने में यह शब्द हालो (Hallow) हो गया. जबकि शेक्सपियर के जमाने में हालू (Halloo) बन गया, और फिर कुछ बदलाव के साथ यह हालवा, हालूवा, होलो (Hallloa, Hallooa, Hollo) बना गया.

जब टेलीफोन का आविष्कार हुआ तो सबसे पहले लोग फोन पर कहते थे ‘आर यू देयर’. लेकिन अमेरिकी आविष्कारक टॉमस एडिसन को इतना लंबा वाक्य बिल्कुल पसंद नहीं था. उन्होंने जब पहली बार फोन किया तो ‘आर यू देयर’ की जगह ‘हलो’ शब्द का इस्तेमाल किया. क्योंकि उन्हें पता था जब ‘आर यू देयर’ कहने पर आवाज दूसरे छोर पर पहुंच रही है तो फिर हलो शब्द भी पहुंच जाएगा.

हालांकि सबसे पहले टेलीफोन पर बातचीत से पहले ‘व्हाट इज वॉन्टेड’, ‘आर यू देयर’ और ‘आर यू रेडी टू टॉक’ जैसे वाक्यों पर भी विचार किया गया था. लेकिन ये कभी चलन में नहीं आ पाए.

हैलो शब्द सबसे पहले लिखित रूप में 1833 में इस्तेमाल हुआ. यह 1883 में नोह वेबस्टर्स डिक्शनरी में लिया गया था, जो 1860 के बाद से चलन में आ गया. फोन पर इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1887 में थॉमस अल्वा एडिसन ने किया था और जो अब तक चला आ रहा है.

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