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ये क्या कर रही बिजली कंपनी…

अघोषित बिजली कटौती पर मुनासिब जवाब नहीं दे पा रही बिजली कंपनी के अधिकारी, संक्रामक महामारी के बीच फंसे लोग नहीं कर पा रहे आंदोलन

धार.
एक ओर जहां कोरोना वायरस से फैली संक्रामक बीमारी के कारण पूरा जिला तितर-बितर है और लोग परेशान हैं. वहीं परेशानी खड़ी करने में बिजली कंपनी भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है. इधर गर्मी का दौर शुरु हो चुका है, उधर बीमारी के कारण घरों में बैठे रहने की मजबूरी. इस बीच अघोषित बिजली कटौती के कारण लोगों की परेशानी का सबब साफ नजर आ रहा है. पिछले कुछ दिनों से पूरे जिले में हर थोड़ी देर में मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती की जा रही है. कोरोना के कहर में गर्मी के दौर से उबरने के लिए पंखे की हवा जरूरी है, लेकिन बिजली कंपनी की लापरवाही से परेशान गुस्सा लोग लॉक डाउन के दबाव में आंदोलन भी नहीं कर पा रहे हैं.
नियम कहता है, मेंटेनेंस के लिए सूचना जाहिर करना जरूरी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली अघोषित कटौती के नाम चढ़ी हुई है. दिन भर में 10 से 12 बार बिजली बंद चालू होने के कारण कई जगह बल्ब फ्यूज हो रहे हैं, वहीं पंखा नहीं चलने के कारण जिले का निमाड़ी क्षेत्र गर्मी से तरबतर हो रहा है. गौरतलब है कि इस समय जिले का निमाड़ी क्षेत्र मतलब कुक्षी, मनावर, गंधवानी, धामनोद, धरमपुरी जैसा इलाका बड़ी गर्मी की चपेट में रहता है. जहां कूलर, पंखे, एयर कंडीशनर आदि से राहत पाने की कोशिश की जाती है. वहीं गर्मी के इस माहौल में की बिजली कंपनी अघोषित कटौती के नाम पर लोगों को परेशान करने से पीछे नहीं हट रही है. गर्मी की धमक तेज हुई और हवाओं के बीच भी उमस बढ़ गई है. लॉकडाउन से घरों में कैद लोग उमस से परेशान होने लगे हैं. तीसगांव विद्युत वितरण केंद्र पर छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 25 से 30 गांव हैं. लॉक डाउन के कारण स्कूल, कॉलेज बंद, घरों में रहना मजबूरी और गर्मी के दबाव में पंखे की राहत नहीं मिलना लोगों को दोहरी मुसीबत झेलने को मजबूर कर रहा है. इसका कारण केवल बिजली कंपनी की लापरवाही है. फोन लगाने पर बिजली कंपनी के अधिकारी मुनासिब जवाब नहीं दे रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश तो है लेकिन वह इसका खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं. तर्कसंग्रह को एक उपभोक्ता ने फोन लगाकर अपनी मजबूरी बताई. उपभोक्ता का कहना था कि गांव के सभी लोग फोन पर एक दूसरे से बात कर आंदोलन करने की योजना तो बना रहे हैं, लेकिन कोरोना बीमारी के कारण हुए लॉक डाउन में यह संभव नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि जल्द ही व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो लॉक डाउन के बाद वे बिजली कंपनी के खिलाफ सड़क आंदोलन करेंगे.

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